बिहार के किसी थाना में एक ही व्यक्ति का बार-बार आना-जाना देखा जाता है और इन लोगों का थाना में आने का कोई उद्देश्य नहीं होता है. ये व्यक्ति अक्सर थाना के दलाल के रूप में पहचाने जाते हैं. ऐसे व्यक्तियों का थाना में आना-जाना पुलिस की छवि को खराब करता है और पुलिस प्रशासन की प्रभावशीलता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है

DGP के नए आदेश के मुताबिक अब प्रत्येक थाना में एक आगंतुक कक्ष बनाना और आगंतुक पंजी रखना जरूरी होगा. इसमें थाना में आने-जाने वाले हर व्यक्ति का नाम, पता, आने का उद्देश्य और मोबाइल नंबर पंजी में अंकित किया जाएगा.
सीनियर पुलिस अधिकारी जैसे एसएसपी, एसपी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक, और अंचल पुलिस निरीक्षक को थाना का निरीक्षण करते वक्त विजिटर रजिस्टर और CCTV फुटेज की जांच करनी होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी की जानकारी को छिपाया तो नहीं गया है
यदि किसी व्यक्ति का नाम बार-बार रजिस्टर में दर्ज हो, तो अंचल पुलिस निरीक्षक या एसपी के स्तर पर उसकी पूरी जांच की जाएगी और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. किसी भी प्रकार की अनियमिता पाए जाने पर संबंधित थानाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.