Thursday, April 3, 2025

रतनी प्रखंड के ऑपरेटर समेत चार पर प्राथमिकी दर्ज

रतनी प्रखंड कार्यालय में गुरुवार को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गये प्रमुख पति मो बबन व नजीर दिनेश कुमार प्रभाकर के मामले में

निगरानी ने प्रखंड प्रमुख अशर्फी खातून, कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज कुमार समेत चार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है. विजिलेंस टीम के धावा दल के जांच पड़ताल में प्रमुख एवं कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका

संदिग्ध पायी गयी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है. ऐसे में प्रमुख पति नजीर के अलावा प्रमुख एवं कंप्यूटर ऑपरेटर भी निगरानी के कार्रवाई के जद में आ सकते हैं. फिलहाल प्रखंड कार्यालय में रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गये प्रमुख पति मो बबन मियां एवं

नजीर दिनेश कुमार प्रभाकर को जेल भेज दिया गया है. विजिलेंस की

टीम के छापा पड़ने के बाद पूरे जिले में हड़कंप मचा है. धावा दल के प्रभारी डीएसपी पवन कुमार के अनुसार निगरानी अन्वेंशन ब्यूरो के

पास पकड़े गये दो लोग समेत चार के विरुद्ध भ्रष्टाचार में शामिल रहने की सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. बताते चलें कि पोखवा निवासी प्रमोद कुमार के द्वारा 15वें वित्त आयोग से

वर्ष 20- 21 में गांव में 7 लाख 48 हजार की राशि से फेबर ब्लॉक लगाकर रास्ता का निर्माण किया था, जिसकी बील भुगतान के लिए भ्रष्ट कर्मी एवं जनप्रतिनिधि दोनों मिलकर परेशान कर रहे थे एवं उन्हें

बार-बार ब्लॉक कार्यालय का चक्कर काटने पर मजबूर कर रहे थे. ब्लॉक कर्मी एवं जनप्रतिनिधि के कार्य प्रणाली से शिकायतकर्ता काफी क्षुब्ध थे. बिल भुगतान बीडीओ और प्रमुख के डोंगल से होना था.

इसके लिए इन्होंने प्रमुख अशरफी खातून से अनुरोध किया था तो उन्होंने अपने पति के पास बात करने के लिए भेज दिया. वहीं उसके पति मो बबन, नजीर दिनेश कुमार प्रभाकर, कंप्यूटर ऑपरेटर सूरज

कुमार ने बिल भुगतान के लिए कुल 80 हजार की राशि के डिमांड कर डाली थ. इस राशि में बीडियो के नाम पर भी 25000 रुपया मांगी गयी थी, जिसमें नाजिर के चेंबर मे प्रखंड प्रमुख पति मो बबन को 25 हजार

व नजीर दिनेश कुमार प्रभाकर को 15 हजार रुपए दिया गया था, जिसके बाद रिश्वत लेते हुए निगरानी की टीम ने दोनों को रंगे हाथ धर दबोचा था. कंप्यूटर ऑपरेटर कार्यालय में नहीं थे जिसके कारण वह

बच गए थे. हालांकि उसके द्वारा रिश्वत मांगने की बात पुष्टि हुई है. वहीं रिश्वत में बीडीओ की भूमिका स्पष्ट नहीं होने के कारण धावा दल ने जांच के बाद छोड़ दिया. प्राथमिकी के दर्ज होने के बाद रतनी प्रखंड प्रमुख एवं कंप्यूटर ऑपरेटर पर भी गाज गिर सकती है.

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